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Tuesday, 4 February 2014

कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना

कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,,
यूँ बात बढ़ा कर क्या करना,,

तुम मेरे थे, तुम मेरे हो,,
दुनिया को बता कर क्या करना,,
तुम साथ निभाओ चाहत से,,
कोई रस्म निभा कर क्या करना,,
तुम खफ़ा भी अच्छे लगते हो,,
फिर तुमको मना कर क्या करना,,
तेरे दर पे आके बैठे हैं,,
अब घर भी जाकर क्या करना,,
दिन याद से अच्छा गुजरेगा,,
फिर तुम को बुला कर क्या करना।।

हमें मालूम है

"हमें मालूम है दो दिल जुदाई सह नहीं सकते,
मगर रस्मे-वफा ये है कि, ये भी कह नहीं सकते,
जरा कुछ देर तुम उन साहिलों की चीख सुन भर लो,
जो लहरों में तो डूबे हैं, मगर संग बह नहीं सकते...!!!"

दिल टुटा है जिस कदर आज

"दिल टुटा है जिस कदर आज,, ऐसे टुटा तो ना था पहले कभी,
 ये तुमसे कि मौहब्बत का नतीजा है,, या हमारी वफा का"

बड़ा दिलदार था वो

''बड़ा दिलदार था वो हीरा गवाँ के भी मुस्कुराता है,
पत्थर की जुस्तजू में हम नादान रोये ही जा रहे हैं''

Tuesday, 7 January 2014

ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ

ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ
मुझे तुम से मोहब्बत है बताना भूल जाता हूँ

तेरी गलियों में फिरना इतना अच्छा लगता है
मैं रास्ता याद रखता हूँ, ठिकाना भूल जाता हूँ

बस इतनी बात पर मैं लोगों को अच्छा नहीं लगता
मैं नेकी कर तो देता हूँ, जताना भूल जाता हूँ

शरारत ले के आखों में वो तेरा देखना तौबा
मैं नज़रों पे जमी नज़रें झुकाना भूल जाता हूँ

मोहब्बत कब हुई कैसे हुई सब याद है
मुझको मैं कर के मोहब्बत को भुलाना भूल जाता हूँ.

हम तो तेरे दिल की महफ़िल सजाने आए थे

हम तो तेरे दिल की महफ़िल सजाने आए थे;
तेरी कसम तुझे अपना बनाने आए थे;
किस बात की सजा दी तुने हमको बेवफा;
हम तो तेरे दर्द को अपना बनाने आए थे।

सुबह आशिक़ बने फिरते हैं जो ज़माने में

सुबह आशिक़ बने फिरते हैं जो ज़माने में
रात होते ही नज़र आते हैं मयखाने में
इश्क में बने फिरते देवदास जो लोग,
लगे रहते हैं फ़क़त शराब को आजमाने में

कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,

कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,,
यूँ बात बढ़ा कर क्या करना,,
तुम मेरे थे, तुम मेरे हो,,
दुनिया को बता कर क्या करना,,
तुम साथ निभाओ चाहत से,,
कोई रस्म निभा कर क्या करना,,
तुम खफ़ा भी अच्छे लगते हो,,
फिर तुमको मना कर क्या करना,,
तेरे दर पे आके बैठे हैं,,
अब घर भी जाकर क्या करना,,
दिन याद से अच्छा गुजरेगा,,
फिर तुम को बुला कर क्या करना।।...!!!

मेरे दिल के आईने के टुकड़े हज़ार होंगे

मेरे दिल के आईने के टुकड़े हज़ार होंगे,
उन टुकड़ियों में फिर भी दीदार ए यार होंगे,
उनको सजा न देना दिल तोड़ जो गए हैं,
उनको भी एक दिन तो पछतावे यार होंगे ।

धूप भी खुल के कुछ नहीं कहती

धूप भी खुल के कुछ नहीं कहती ,
रात ढलती नहीं थम जाती है ,
सर्द मौसम की एक दिक्कत है ,
याद तक जम के बैठ जाती है

Sunday, 5 January 2014

हो भी गया प्रेम हम मे तो बोलो, मिलन कहाँ पर होगा |

मैं पीडा का राज कुंवर हूँ, तुम शहजादी रूपनगर की,
हो भी गया प्रेम हममें तो बोलो, मिलन कहाँ पर होगा |

मेरा कुरता सिला दुखों ने, बदनामी ने काज निकाले,
तुम जो आँचल ओढे उसमे, अम्बर ने खुद जड़े सितारे |
मैं केवल पानी ही पानी, तुम केवल मदिरा ही मदिरा,
मिट भी गया भेद तन का तो, मन का हवन कहाँ पर होगा |

मैं जन्मा इसलिए कि थोडी उम्र आंसुओं की बढ़ जाए,
तुम आई इस हेतु कि मेंहदी, रोज नए कंगन बनवाए,
तुम उदयाचल, मैं अस्ताचल, तुम सुखांत की मैं दुखांत की,
मिल भी गए अंक अपने तो रस अवतरण कहाँ पर होगा |

मीलों जहाँ न पता खुशी का, मैं उस आंगन का इकलौता,
तुम उस घर की कली जहाँ, नित होंठ करे गीतों का न्यौता |
मेरी उम्र अमावस काली और तुम्हारी पूनम गोरी,
मिल भी गई राशि अपनी तो बोलो लगन कहाँ पर होगा |

इतना दानी नही समय कि, हर गमले मे फूल खिला दे,
इतनी भावुक नही जिंदगी, हर ख़त का उत्तर भिजवा दे |
मिलना अपना सरल नही पर, फिर भी यह सोचा करता हूँ,
जब न आदमी प्यार करेगा, जाने भुवन कहाँ पर होगा |

हो भी गया प्रेम हम मे तो बोलो, मिलन कहाँ पर होगा |
सुबूत हैं मेरे घर में धुएं के ये धब्बे, कि कभी यहां उजालों ने खुदकुशी की है

Wednesday, 1 January 2014

नव वर्ष २०१४ शुभ हो

"जायचा देख के बोला ये नज़ूमी मुझ से ,
जो भी माँगा है वो हर हाल में मिल जायेगा ,
क्या मुबारक है नया साल जो मैं खुश होऊं ?
वो जो बिछुड़ा है क्या इस साल में मिल जायेगा?"

नया साल आया है दिवाली नही

कुछ शुरवीर टाईप के लोग पटाखे बजा रहै हैं

अबे हरामखोरो नया साल आया है दिवाली नही !

Sunday, 29 December 2013

मैं मुर्दो में जिंदा हु मरे बिना

दिल में रोग पर खौफ मेरे मन मे ना "

" मैं मुर्दो में जिंदा हु मरे बिना ! !

ज़िंदा रहेंगे

ज़िंदा रहेंगे तो हर दिन तुम्हें हम याद करेंगे..

भूल गये तो समझ लेना खुदा ने हमें याद कर लिया.. :)”

Saturday, 28 December 2013

हद हैं !

सुबह सुबह हर घर में झाडू पोंचा लगने के बाद 

मानो पुरे घर में ही कर्फ्यु लग गया हो ,

माँ ~ हरामखोर चप्पल पहन के रसोई में मत जा अभी पोंचा लग गाया हैं , हाल में मत जा

चप्पल पहन के इधर मत जा ऊधर मत जा !

हद हैं !

लोग हमारी आँखों पे मरते है

तेरी सूरत को जब से मैने अपनी आँखों से देखा है ,

लोग हमारी आँखों पे मरते है !

बेवफाई का मुकदमा

कैसे करू ( मुकदमा ) उस पर बेवफाई का ,

कमबख्त ये दिल भी उसका "वकील" निकला

घंटा सहेगी प्यार के दर्द

वो क्या घंटा सहेगी प्यार के दर्द को ,

कल Activa से गिरी , अब तक रो रही है!