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Tuesday, 7 January 2014

हम तो तेरे दिल की महफ़िल सजाने आए थे

हम तो तेरे दिल की महफ़िल सजाने आए थे;
तेरी कसम तुझे अपना बनाने आए थे;
किस बात की सजा दी तुने हमको बेवफा;
हम तो तेरे दर्द को अपना बनाने आए थे।

ßAßAJI KA THULLU

Pichle saal 2013 mein
hum sabne kuch khoya aur kuch paya
Par ek cheez almost sabko mili...
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ßAßAJI KA THULLU

सुबह आशिक़ बने फिरते हैं जो ज़माने में

सुबह आशिक़ बने फिरते हैं जो ज़माने में
रात होते ही नज़र आते हैं मयखाने में
इश्क में बने फिरते देवदास जो लोग,
लगे रहते हैं फ़क़त शराब को आजमाने में

एक बार एक हवाई

एक बार एक हवाई
जहाज मे 5 व्यक्ति सफर
कर रहे थे ,
सचिन , अंबानी ,
राहुल गांधी,
Kejriwal र एक
छोटी सी बच्ची।

अचानक जहाज म
े कुछ खराबी आ गई।

वहाँ पर चार पैराशूट थे।

सचिन बोला: मैं विश्व
का महान बल्लेबाज हूँ,
मेरा जिंदा रहना जरूरी है,
फिर एक
पैराशूट लेकर कूद गया।

अंबानी बोला: मैं भारत
के धनी लोगो मे से
हूँ, मेरा जिंदा रहना
जरूरी है, फिर एक
पैराशूट लेकर कूद गया।

राहुल गांधी बोला :
मैं इस देश का सबसे
लोकप्रिय नेता हूँ,
मेरा जिंदा रहना जरूरी है।
फिर एक पैराशूट
लेकर कूद गया।
Kejriwal बच्ची
से बोले: बेटा आप देश
की भविस्य हो, जाओ
आप अंतिम पैराशूट
लेकर कूद जाओ।

बच्ची बोली : लेकिन यह
पर
तो दो पैराशूट है,
राहुल गांधी तो मेरा
स्कूल बैग लेकर कूद गया !

कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,

कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,,
यूँ बात बढ़ा कर क्या करना,,
तुम मेरे थे, तुम मेरे हो,,
दुनिया को बता कर क्या करना,,
तुम साथ निभाओ चाहत से,,
कोई रस्म निभा कर क्या करना,,
तुम खफ़ा भी अच्छे लगते हो,,
फिर तुमको मना कर क्या करना,,
तेरे दर पे आके बैठे हैं,,
अब घर भी जाकर क्या करना,,
दिन याद से अच्छा गुजरेगा,,
फिर तुम को बुला कर क्या करना।।...!!!

मेरे दिल के आईने के टुकड़े हज़ार होंगे

मेरे दिल के आईने के टुकड़े हज़ार होंगे,
उन टुकड़ियों में फिर भी दीदार ए यार होंगे,
उनको सजा न देना दिल तोड़ जो गए हैं,
उनको भी एक दिन तो पछतावे यार होंगे ।

Kya hunn main or kya samjhte hain

Kya hunn m or kya samjhte h mujhe jamane wale„ 
Sab raaj nhi hote batane wale,
Kabhi akar dekhna tanhaiyo me hmari,
Kaise rote h sabko hasaane wale

धूप भी खुल के कुछ नहीं कहती

धूप भी खुल के कुछ नहीं कहती ,
रात ढलती नहीं थम जाती है ,
सर्द मौसम की एक दिक्कत है ,
याद तक जम के बैठ जाती है

Sunday, 5 January 2014

जिनका कोई पहरेदार न था

इसीलिये नगर नगर बदनाम हो गये मेरे आंसू
मैं उनका हो गया जिनका कोई पहरेदार न था

हो भी गया प्रेम हम मे तो बोलो, मिलन कहाँ पर होगा |

मैं पीडा का राज कुंवर हूँ, तुम शहजादी रूपनगर की,
हो भी गया प्रेम हममें तो बोलो, मिलन कहाँ पर होगा |

मेरा कुरता सिला दुखों ने, बदनामी ने काज निकाले,
तुम जो आँचल ओढे उसमे, अम्बर ने खुद जड़े सितारे |
मैं केवल पानी ही पानी, तुम केवल मदिरा ही मदिरा,
मिट भी गया भेद तन का तो, मन का हवन कहाँ पर होगा |

मैं जन्मा इसलिए कि थोडी उम्र आंसुओं की बढ़ जाए,
तुम आई इस हेतु कि मेंहदी, रोज नए कंगन बनवाए,
तुम उदयाचल, मैं अस्ताचल, तुम सुखांत की मैं दुखांत की,
मिल भी गए अंक अपने तो रस अवतरण कहाँ पर होगा |

मीलों जहाँ न पता खुशी का, मैं उस आंगन का इकलौता,
तुम उस घर की कली जहाँ, नित होंठ करे गीतों का न्यौता |
मेरी उम्र अमावस काली और तुम्हारी पूनम गोरी,
मिल भी गई राशि अपनी तो बोलो लगन कहाँ पर होगा |

इतना दानी नही समय कि, हर गमले मे फूल खिला दे,
इतनी भावुक नही जिंदगी, हर ख़त का उत्तर भिजवा दे |
मिलना अपना सरल नही पर, फिर भी यह सोचा करता हूँ,
जब न आदमी प्यार करेगा, जाने भुवन कहाँ पर होगा |

हो भी गया प्रेम हम मे तो बोलो, मिलन कहाँ पर होगा |