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Thursday, 19 December 2013

चेहरा जब आंसूओं से तरबतर होगा


चेहरा जब आंसूओं से तरबतर होगा
झील सी आँखों में तब दर्द का बसर होगा

नजरें दूर तलक जाके लौट आयेंगी
धुंध का जिंदगी में जब भी असर होगा

जब उठाओगे तलवार बेवफाई की
सामने देखना मेरा ही झुका सर होगा

हर घूँट तेरे नाम का है मंजूर मुझे
अमृत होगा वो या के जहर होगा

दर्द के मेले में भी हंसती हो ख़ुशी
ऐसा कोई तो इस जहान में शहर होगा

गर लौट भी आये तो क्या होगा
अब सिन्दूर वो किसी और ही के सर होगा .. !!

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