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Saturday, 17 December 2011

क्या तुझे मेरी याद न आई ?



क्या तुझे मेरी याद न आई?
पल को भी कोई बात न सताई?
की कोई दूर याद करता होगा
हाए! यह कैसी रुसवाई

बहुत याद करते है आज भी
उतना ही डरते आयी आज भी
एक बार तूने पुकारा तो होता
मैं तो बिन कहे ही चले आई

लब मेरे तपते है लाबो पे
तेरी एक झलक को तडपे है मॅन
कोई खुवब देखा तो होगा
मेरी ससों तो तेरी खुसबू है आई

आजा पिया लग जा गले
और आब यूह न सता
यादों में तेरी गुम्सुम मैं
मैं तेरी यादें और मेरी तन्हाई

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